दर्द मे लिपटी ग़ज़ल है अब हमारी आपकी
लिख रही केवल असल है अब हमारी आपकी
जिस तरफ देखो नज़ारा एक ही मिल जायेगा
हर कोई करता नक़ल है अब हमारी आपकी
प्यार मे जब तक अहं था तब तलक मुश्किल लगी
राह ये कितनी सरल है अब हमारी आपकी
आपके ये रंग जब तक ज़िन्दगी के साथ हैं
हर सुबह मीठी तरल है अब हमारी आपकी
कल 'रमा' रंगीन सपने ही जहाँ देखे गए
आज क्यों आँखों मे जल है अब हमारी आपकी
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Thursday, July 15, 2010
Wednesday, July 14, 2010
आंसुओं के घर में भी
आंसुओं के घर में भी ज़िन्दादिली की बात कार
ये घुटन वाले हैं घर तू रोशिनी की बात कार
हर कदम पे मौत मेरे साथ में चलती ही है
इसलिए कहती हूँ तुझसे ज़िन्दगी की बात कार
दर्द अपना, आह अपनी मन के घर में बंद रख
यों न हर पल जग से अपनी बेबसी की बात कर
ज़िन्दगी जीने का तू ये भी सलीका सीख ले
सब के संग नेकी ही कर,तू मत बदी की बात कर
ये बनावट बाँट देगी तुझको टुकड़ो में 'रमा'
हो सके तो सादगी से सादगी की बात कर
ये घुटन वाले हैं घर तू रोशिनी की बात कार
हर कदम पे मौत मेरे साथ में चलती ही है
इसलिए कहती हूँ तुझसे ज़िन्दगी की बात कार
दर्द अपना, आह अपनी मन के घर में बंद रख
यों न हर पल जग से अपनी बेबसी की बात कर
ज़िन्दगी जीने का तू ये भी सलीका सीख ले
सब के संग नेकी ही कर,तू मत बदी की बात कर
ये बनावट बाँट देगी तुझको टुकड़ो में 'रमा'
हो सके तो सादगी से सादगी की बात कर
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